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भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है। काल भैरव अष्टकम एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना आदि शंकराचार्य जी ने की थी। इस स्तोत्र के नियमित पाठ से भय, अकाल मृत्यु, नकारात्मक ऊर्जा, शत्रु बाधा और ग्रह दोष समाप्त होते हैं।

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