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Description

 


 


 


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  ये प्रयोग शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से ३ दिन का है lइस प्रयोग के लिए गुलाबी वस्त्र,आसन  और पुष्प की आवशयकता होती है l अर्ध रात्रि में इस प्रयोग को किया जाता है l प्रतिदिन ११ माला जप स्फटिक माला से किया जाता हैl प्रयोग के प्रारंभ में स्नान करके अन्तः वस्त्र नहीं पहनना है.मात्र धोती या साडी धारण करना है. पूजन कक्ष में आसन पर बैठ कर दैनिक साधना विधि से सदगुरुदेव और भगवान गणपति का पूरी तरह पूजन कर साधना और साध्य से सम्बंधित संकल्प ले और बाजोट पर गुलाबी वस्त्र बिछाकर उस पर कुमकुम से निम्न यन्त्र अंकित कर उसके मध्य में चौमुखा दीपक प्रज्वलित कर दे और उसका पूजन निम्न मन्त्रों से करे और जहाँ जहाँ ‘क्लीं’ अंकित है वहाँ कुमकुम और गुलाब का इत्र लगाएं. गुलाब के पुष्प,लवंग,कपूर,पान और खीर का भोग अर्पित करे . यन्त्र अंकित करते समय निम्न मंत्र का २१ बार उच्चारण करे और बाद में दीपक जलने के पहले कुमकुम से रंगे  १०८ चावलों को यन्त्र बनाते समय उच्चारित किये गए मन्त्र से एक-एक करके उस यन्त्र और दीपक पर अर्पित करें.


 यन्त्र बनाते समय उचाचरण करने वाला मंत्र


क्लीं रत्यै क्लीं नमः


मूल मन्त्र-


अनंग की रानी अनंग की रानी सुन्दर रति कहावे, रति रति  काम पुष्प बाण बिराजे,काम की रानी अनंग की रानी चित्त बीच ठोर लगावे,प्रेम भाव उपजावे, उलझी मति सुलझावे ,जो ना ठोर लगावे ,कारज ना कर जावे तो दुहाई सारंग नाथ की,छू ..


अंतिम दिवस तक नित्य यही क्रम रहेगा.आखिरी दिन साधना पूर्ण होने के बाद सद्गुरु के चरणों में  सफलता की प्रार्थना करे और सभी सामग्री सुनसान स्थान पर विसर्जित करदे.ये प्रयोग परखा हुआ है.आप भी अपना अभीष्ट प्राप्त करे


 


 

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